एक कटिंग चाय ☕

बहुत सालों पहले, एक कटिंग चाय के बुलावे पर, चार यार चुटकियों में मिल जाते थे,
बैठकर साथ उस कैंटीन में, किसी भी बात पर खुलकर हँस जाते थे।

जोक चाहे लैंड हो या ना हो, हम इतना हँसते कि दिल के सारे तार खुल जाते थे,
कटिंग चाय तो सिर्फ एक बहाना था, दिल से दिल के कनेक्शन का वो ज़माना था।

साल गुजरते गए, चाय के दाम बढ़ते गए, और दोस्त बिखरते गए,
पता ही नहीं चला कि कब हमारी चाय मीठी से शुगरफ्री, और फिर बिलकुल ही फीकी हो गई।

उम्र का तकाज़ा कुछ ऐसा हुआ, कि शैतानियाँ नादानियाँ लगने लगीं,
हँसना तो दूर की बात है, हम मुस्कुराना भी भूल गए।

अब तो ये हाल है जनाब, कि चाय दोस्ती नहीं, कब्ज़ और सर दर्द का इलाज है,
अब हम काली और कड़वी ही पसंद करते हैं, कुछ और पीने से डरते हैं।

पर चाय पर हमारा दिल आज भी निसार है, हमारे लिए वो यादों का भंडार है,
ज़रूरत है एक चुटकी दोस्ती की, जो बढ़ा दे इसकी मिठास,

एक ऐसी टपरी की जो मिला दे हमें फिर एक बार।

आज सुबह उठी तो वो ज़माना और उस वक्त के दोस्त याद आ गए,

चलो यार, एक बार फिर…………..एक कटिंग चाय हो जाए…

चलो यार, एक बार फिर………….. एक कटिंग चाय हो जाए…

©Dr. Aparna Govil Bhasker

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